रिटेल बाजार में 51 फीसदी विदेशी निवेश की सिफारिश की गई है. सचिवों की कमेटी ने इसे मंजूरी दे दी है अब सरकार को आखिरी फैसला लेना है. यानि गरीबों के पेट पर एक और लात। घर के बगल में किराना का दुकान चलाने वाला पहले से ही सुपर स्टोर से परेशान था, अब विदेशी उसे नमक दाल भी नहीं बेचने देंगे। पता नहीं गरीबों का और कितना बुरा हाल होना है।
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राम न जाने क्या होगा?
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