शैलेंद्र की एक कविता
क्या पाप
क्या पुण्य
क्या काशी
क्या काबा
इंसानों के अन्दर
बची रहे आदमियत
साथ उनके बना रहे
सबसे सुन्दर शब्द
'भालोबासा'
गांव खत्म, शहर शुरू – बेंगळुरु/जैमालुरु
15 hours ago
है बड़ा अल्लाह न भगवान है, आदमी की भूख ही सबसे बड़ी है
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4 comments:
सर्वेश्वर को याद दिला दिया...
इस दुनिया में आदमी की जात से बडा कुछ भी नहीं
न ईश्वर, न ज्ञान, न मजहब, न संविधान
इसके विरोध में लिखी कोई भी ईबारत फाडी जा सकती है
जमीन की सात परतों के भीतर गाडी जा सकती है
लेकिन गुरु जरा बताइये
आदमीयत को जीवित रखने के लिए
एक दारोगा को गोली मारने का अधिकार है
तो मुझे क्यों नहीं?
सर्वेश्वर को याद दिला दिया...
इस दुनिया में आदमी की जात से बडा कुछ भी नहीं
न ईश्वर, न ज्ञान, न मजहब, न संविधान
इसके विरोध में लिखी कोई भी ईबारत फाडी जा सकती है
जमीन की सात परतों के भीतर गाडी जा सकती है
लेकिन गुरु जरा बताइये
आदमीयत को जीवित रखने के लिए
एक दारोगा को गोली मारने का अधिकार है
तो मुझे क्यों नहीं?
दिल को छू जानेवाली रचना। बिलकुल ठीक। सच्चाई की सच्चाई है यह रचना।
सुन्दर! पूर्णतया सहमत हूँ ।
घुघूती बासूती
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