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Thursday, January 17, 2008

ब्लॉगर्स से डर गए मुशर्रफ़

आखिरकार मुशर्रफ़ डर गए। पाकिस्तानी सेना का पूर्व प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ़! पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ!! आतंकवादियों से खतरे के बारे में उन्होंने सीना ठोंक कर कहा था कि वो अपनी हिफ़ाजत करना जानते हैं। मतलब बंदूक से उन्हें डर नहीं लेकिन कलम? कलम से मुशर्रफ़ बहुत डरते हैं। ब्लॉगर्स की लगातार प्रहार करती लेखनी से वो इतना खौफ़ज़दा हो गए कि उन्होंने उन सारे ब्लॉग पर रोक लगा दी, जो उनकी सत्ता को चुनौती दे रहे थे।

जी हां, पाकिस्तान में ब्लॉग्स पर रोक लगा दी गई है। मुशर्रफ के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले ब्लॉगर्स, जिनमें एक बहुत बड़ा तबका विश्वविद्यालय के छात्रों का है, की लेखनी पर रोक तो मुशर्रफ़ के बूते की बात नहीं थी, इसलिए उन्होंने उस माध्यम को ही छीन लेने की कोशिश की, जिसके जरिए वो अपनी बात दुनिया के सामने रख रहे थे। पाकिस्तानी सरकार के आदेश पर ब्लॉग्स को होस्ट करने वाले डोमेन blogsopt.com पर रोक लगा दी गई है लेकिन जिन्हें अपनी बात रखनी है, भला उनकी आवाज़ इन हथकंडों से कहां बन्द होने वाली।
मुशर्रफ़ का ये डर ब्लॉग और ब्लॉगर्स की बढ़ती हुई ताक़त का सबूत है। ताक़त इसलिए कि उसमें सच्चाई है। जब तक ब्लॉग में ये सच बिना किसी डर और संपादन के दिखता रहेगा, तब तक ब्लॉग से हर झूठा आदमी खौफ़ खाता रहेगा। पाकिस्तानी ब्लॉगर्स अपने यहां के हालात पर किस तरह मुखर हैं, इसके कछ उदाहरण मैं आपको देता हूं। GHORABA नाम के एक ब्लॉग का एक हेडर देखिए--
MUSHARRAF HAS DONE A LOT FOR PAKISTAN
हेडर पढ़कर ऐसा लग सकता है कि इसमें मुशर्रफ की तारीफ़ की गई होगी लेकिन उसके नीचे छपी है केवल एक तस्वीर। वो तस्वीर आप भी देख लीजिए। सच्चाई खुद ब खुद सामने आ जाएगी।
एक और ब्लॉग है THE EMERGENCY TIMES. ये ब्लॉग अपने परिचय में लिखता है--
''AN INDEPENDENT PAKISTANI STUDENT INITIATIVE AGAINST INJUSTICE AND OPPRESSION, PROVIDING REGULAR UPDATEDS ON EMERGENCY SITUATION.''
परिचय के मुताबिक ही इमरजेंसी के दौरान और उसके बाद भी हो रही नाइंसाफ़ी और ज्यादतियों की ख़बरें इस ब्लॉग पर मिल जाएंगी। सरकार तो बौखलाएगी ही।
THE PAKISTAN SPECTATOR भी वहां का एक जाना-माना ब्लॉग है। इसमें एक लेख छपा है। शीर्षक है--WILL YOU VOTE FOR A NON-MUSLIM PRIME MINISTER. लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान को एक ईमानदार, बहादुर और कर्मठ प्रधानमंत्री की जरूरत है। तो क्यों न इसके लिए उम्मीदवार के इन गुणों को देखा जाय, वनिस्पत ये देखने के कि वो मुसलमान है या नहीं। हालांकि लेख में इस बात का भी जिक्र है कि पाकिस्तान का संविधान इसकी इजाजत नहीं देता कि किसी गैर इस्लामी व्यक्ति को इस पद पर बिठाया जाय। जाहिर है विचारों का ये खुलापन हर उस सरकार का डराएगी, जो सत्ता में बने रहने के लिए धर्म का इस्तेमाल बतौर हथियार करती है।

3 comments:

mehek said...

so blogs r becoming as powerful as media great,this post is very nice.

सिरिल गुप्ता said...

ये जिसे हम वैकल्पिक मीडिया कह रहे हैं, एक ऐसी शक्ति है जिसे पारंपरिक मीडिया की तरह न तो प्रभावित किया जा सकता है, न धमकाया जा सकता है, और न ही खरीदा जा सकता है. क्यों? क्योंकि ब्लागर हर जगह होंगे, हर तरह के होंगे, किस-किस को रोकेंगे?

आजकल ब्लाग दुनिया मैं वैसे ही पारंपरिक मीडिया की इमानदारी के ऊपर बहुत से सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में जायज़ है की वैकल्पिक मीडिया और सम्माननीय होता जाये.

चाहे मुशर्र्फ हो, चीन, या अपना हिन्दुस्तान, सभी वैकल्पिक मीडिया पर रोक लगाने की कोशिश कर चुके हैं. लेकिन इसे रोकना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.

जिनकी जवाबदारी है, Internet उसे सामने लायेगा.

Vivek Rastogi said...

वाकई यह है ब्लाग की ताकत..!