सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के ब्लॉग पर आपका स्वागत है। ऐसे ही आते रहिए, अच्छा लगता है

 

 

Tuesday, January 15, 2008

राजा की आएगी बारात

शैलेंद्र की दो कविताएं

सुंदरता
एक चेहरे को देख
उमड़-घुमड़ जाता है मन
दूसरे को देख
कांप-कांप!

मध्यवर्ग
राजा की आएगी बारात
मगन मन नाचेंगे आप
नकल ही नियति
यही है अभिशाप

शैलेंद्र जनसत्ता के कोलकाता संस्करण के संपादक हैं। ये कविताएं उनके कविता संग्रह जनपथ से ली गई हैं

1 comments:

Mired Mirage said...

बढ़िया !
घुघूती बासूती