हालात-एक
एक औरत
चीखना चाहती है
बोलना चाहती है
निकाल देना चाहती है
अपने मन का
सारा गुबार
लेकिन
मुंह बंद कर रखा है
समाज ने
परिवार ने
नहीं हारती वो हिम्मत
पूरा जोर लगाकर
चीखना चाहती है वो
निकालना चाहती है
सच के दो बोल
बढ़ता जाता है
उसकी गर्दन पर दबाव
घुटने लगता है
उसक दम
हालात-दो
एक औरत
चीखना चाहती है
बहुत कुछ
बोलना चाहती है
लेकिन सब कहते हैं
बंद रखो जुबान
क्योंकि
जुबान खोलते ही
वो उगलती है
सच की आग
पड़ जाते हैं
कई जगह छाले
खूब लिखा है
खूब बोला उसने
उसके सच से
बुरी तरह झुलसा समाज
अब बंद करना चाहता है
उसकी जुबान
वो चीखना चाहती है
इस अत्याचार के खिलाफ़
निकालना चाहती है
सच के दो बोल
लेकिन बढ़ता जाता है
उसकी गर्दन पर दबाव
घुटने लगता है उसका दम।


