रागिनी पुरी युवा पत्रकार हैं। ऊर्जा से पूरी तरह लबरेज। मन में है कुछ नया करने का सपना । यहां पेश है उनकी एक कविता। उम्मीद है आपको पसंद आएगी।
अब सब पीछे छूट गया,
मम्मी की डांट,
पापा का प्यार,
अधूरी कॉपियों के फटे पन्ने
स्कूल की शर्ट पर
स्याही की बौछार।
गर्मियों की छुट्टियों में
स्पाइडरमौन से प्यार
ढेर सारा होमवर्क और
कच्चे आम का स्वाद,
कभी नई ड्रेस तो
कभी छड़ी की मार।
दोस्तों से झगड़े,
फिर मान मनुहार,
इंग्लिश में फर्स्ट
पर मैथ्स में हार।
हां, सब पीछे छूट गया,
प्यार भरी पर्चियां
और आई लव यू कार्ड।
खट्टी मीठी गोलियां, इमली, अचार
मिलजुल कर पिकनिक पर जाना,
साथ दीवाली, दशहरा मनाना,
होली पर जमकर हुड़दंग मचाना,
सच...जाना पहचाना तो अब
सब पीछे छूट गया।
आप रागिनी की रचनाओं को उनके ब्लॉग www.merekisse.blogspot.com पर भी जाकर पढ़ सकते हैं।
Saturday, August 18, 2007
सब पीछे छूट गया
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मेहमान का पन्ना
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2 comments:
सच...जाना पहचाना तो अब
सब पीछे छूट गया।
-कितना सच है. आभार इस प्रस्तुति का.
अच्छी/ कविता है । बहुत कुछ याद आ गया बीता छूटा बिसरा
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